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Showing posts from April, 2020

#दिवानी_प्रक्रिया_संहिता_कि_धारा100 #द्वितीय_अपील #second_appeal # CPC_section_100 #DrNupurGoel

प्रश्न) द्वितीय (second) अपील किन आधारो पर और कहॉ दायर की जा सकती है ? ‘ सारवान विधिक प्रश्न ’ के सिद्धांत की विवेचना कीजिए। उत्तर) दिवानी प्रक्रिया संहिता कि धारा 100 के अंतर्गत द्वितीय (second) अपील उच्च न्यायालय मे दयार कि जा सकती है। इसके अनुसार- “ उसके सिवाय जैसा कि इस संहिता के पाठ में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है , उच्च न्यायालय के अधीनस्थ किसी न्यायालय द्वारा अपील में पारित प्रत्येक डिक्री की उच्च न्यायालय में अपील हो सकेगी , यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि उस मामले में विधि का कोई सारवान प्रश्न अंतरवलित है।“ इस प्रकार द्वितीय (second) अपील केवल उच्च न्यायालय मे दाय कि जा सकती है वो भि जब उसमे विधि का कोई सारवान प्रश्न अंतरवलित हो। ‘ विधि का सारवान प्रश्न ’ पद सिविल प्रक्रिया संहिता मे कहीं भी परिभाषित नहीं है। इसकी व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वप्रथम चुन्नी लाल बी0 मेह्ता बनाम सेंचुरी स्पिनिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड AIR 1962 SC 1314 के वाद में की। उच्चत्तम न्यायालय ने कहा कि किसी मामले में को...

#अंतर्निहित_शक्ति_धारा_151_सिविल_प्रक्रिया_संहिता #CPC_section_151 #inherent_powers_of court_in_hindi #DrNupurGoel

प्रश्न)   सिविल न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति के बारे में आप क्या जानते हैं ? क्या आप इस मत से सहमत हैं कि न्यायालय को अंतर्निहित शक्ति नहीं प्रदान की गई है यह शक्ति न्यायालय में इस कर्तव्य के आधार पर अंतर्निहित है कि जो पक्षकार इसके सामने हैं , उनको न्याय दे। पूर्ण रूप से विवेचना कीजिए उत्तर)   वे सभी अधिकार , जो न्यायालय को , न्याय प्रशासन के दौरान , सही और उचित कदम उठाने के लिए तथा गलत कार्य को रोकने के लिए आवश्यक हैं , से न्यायालय के अंतर्निहित अधिकार का गठन होता है। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 में न्यायालय के अंतर्निहित क्षेत्राधिकार का वर्णन किया गया है इसके अनुसार- “ Saving of inherent powers of Court- Nothing in this Code shall be deemed to limit or otherwise affect the inherent power of the Court to make such orders as may be necessary for the ends of justice or to prevent abuse of the process of the Court.” “न्यायालय कि अंतर्निहित शक्तियो की   व्यावृत्ति – इस सहिता की किसी भी बात के बारे मे यह नही समझा जायेगा कि वह ऐसे आदेशो के देने की ...